महाराजा श्री अग्रसेन जी की गाथा (-रेखा मोहिनी बंसल जी@RMB)
अग्रवंश के कुलपितामह महाराजा श्री अग्रसेन जी की गौरव गाथा:
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श्री अग्रसेन महाराज की, हम गाथा गाते हैं हम गाथा गाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों में हम शीश झुकाते हैं, हम शीश झुकाते हैं।
जय अग्रसेन महाराज, जय जय अग्रवाल समाज-੨
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(1) महारानी भगवती देवी थी, राजा वल्लभसेन वल्लभसेन के पिता थे, जिनका नाम था बृहतसेन-੨
हरियाणा में प्रतापनगर की कथा सुनाते हैं, हम कथा सुनाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों में हम शीश झुकाते हैं। हम शीश.....
जय अग्रसेन महाराज, जय जय अग्रवाल समाज-੨
(2) कुंदसेन भाई छोटे थे वल्लभसेन के, केशी नाम का सेनापति रहता था संग उसके-੨
कुंदसेन और केशी दोनों घात लगाते हैं, दोनों घात लगाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(3) राजा वल्लभ भगवती देवी ने शिव ध्यान किया, प्रसन्न हो शिव ने दो पुत्रों का वरदान दिया-੨
भगवती देवी और वल्लभ जी खुशी मनाते हैं बड़ी खुशी मनाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों में.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(4) अश्विन शुक्ला प्रतिपदा को सुंदर फूल खिला, महेन्द्रकाल में वल्लभ जी घर पुत्र ने जन्म लिया-੨
जो श्री अग्रसेन जी नाम से जाने जाते हैं, जाने जाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(5) संदीपन ऋषि के पास आश्रम तांडव्य ऋषि का था, वहीं पे अग्रसेन जी ने शिक्षा का लाभ लिया।
इस दिव्य शिष्य को पा ऋषि फूले ना समाते हैं, फूले ना समाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(6) कालांतर में वल्लभ जी घर दूजा फूल खिला, श्री अग्रसेन जी के छोटे भाई ने जन्म लिया-੨
सूरसेन जी के नाम से जो जाने जाते हैं, जो जाने जाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(7) दिया निमन्त्रण दूत ने आकर वल्लभसेन को, वल्लभसेन जी करें तैयारी युद्ध मे जाने को-੨
पिता-पुत्र दोनों महाभारत युद्ध में जाते हैं, दोनों युद्ध मे जाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(8) युद्ध में वल्लभसेन ने पांडवो का साथ दिया, भीष्मपितामह ने युद्ध में वल्लभ जी को मार दिया -੨
नौ दिनो युद्ध के बाद वीरगति को पाते हैं, वीरगति को पाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों में.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(9) अग्रसेन जी व्याकुल होकर रोने बहुत लगे, स्वयं कृष्ण जी आकर के समझाने उन्हें लगे-੨
मायापति माया से कैसे खेल रचाते हैं, कैसे खेल रचाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(10) अठारह दिन तक युद्ध चला कौरव-पांडव के बीच, धर्म पक्ष में पांडव सारे कौरव सारे नीच-੨
धर्म पक्ष में अग्रसेन जी लड़ते जाते हैं, लड़ते जाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(11) वल्लभ जी ने था कुंदसेन को राजकाज सौंपा, अग्रसेन जी के चाचा ने दिया इन्हें धोखा-੨
छलिया केशी सेनापति इन्हें बन्दी बनाते हैं, इन्हें बन्दी बनाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(12) माँ भगवती रुदन करे कुछ समझ नहीं आता, वफादार सुमन्त इन्हें है कैद से छुड़वाता-੨
सुमन्त न्योछावर होकर इनके प्राण बचाते हैं, इनके प्राण बचाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(13) हो निराश श्री अग्रसेन ऋषि आश्रम पे आये, गर्ग ऋषि को अपनी सारी वेदना बतलाये-੨
श्री अग्रसेन को ऋषिमुनि जी धीर बंधाते हैं, धीर बंधाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(14) गर्ग ऋषि की आज्ञा से लक्ष्मी जी का ध्यान किया, खुश होकर के लक्ष्मी जी ने है आशीर्वचन दिया-੨
जो मुझमें ध्यान लगाते हैं, वो मुझको पाते है वो मुझको पाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(15) बोली लक्ष्मी जी अग्रघरो में सदा रहूंगी मैं, हे अग्रजनक तुमको तो लक्ष्मी पुत्र कहूंगी मैं-੨
तब से ही हम सारे लक्ष्मी पुत्र कहाते हैं, लक्ष्मी पुत्र कहाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(16) लक्ष्मी जी बोली बीहड़ धरती को तुम खुदवाओ, इसके नीचे जो सोना दबा है उसको तुम पाओ-੨
अब आगे की सुनो कहानी तुम्हें सुनाते हैं, हम तुम्हे सुनाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(17) माँ की आज्ञा से अग्रसेन ने धरती खुदवाई, भांति भांति की धन सम्पदा उसने है पाई-੨
नये राज्य की इस धन से वो नींव सजाते हैं, वो नीव सजाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(18) नागवंश कि राजकुमारी माधवी जिनका नाम, ब्याह हो गया माधवी संग में बसा अग्रोहा धाम-੨
कैसे इनका राज चला वो बात बताते हैं, वो बात बताते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(19) सूझबूझ से राजकाज फिर इनका चलने लगा, सुखमय सूरज उदय होता था सुखमय ढलने लगा-੨
प्रजा व राजा दोनों ही बड़ी खुशी मनाते हैं, दोनों खुशी मनाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(20) अग्रसेन जी की ख्याति से इंद्र भी जलने लगा, अग्रसेन के राज में इंद्र ने रोक दी फिर वर्षा -੨
अग्रसेन जी लक्ष्मी का फिर ध्यान लगाते हैं, फिर ध्यान लगाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(21) अग्रसेन जी को लक्ष्मी जी ने फिर वरदान दिया, इंद्र तुम्हारा कुछ ना बिगाड़े ऐसा वचन दिया-੨
अग्रवंश ही रहेगा आगे आशिष पाते हैं, फिर आशिष पाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(22) श्री अग्रसेन महाराज ने अठारह यज्ञ किये, यज्ञ की पूर्ति हेतु पशुओं की बलि दिए-੨
हिंसा से हृदय में करुणा रस भर जाते हैं, करुणा रस भर जाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(23) अग्रसेन महाराज जी ने फिर से यज्ञ किया, इसी यज्ञ को बिना बलि के फिर से पूर्ण किया-੨
इस यज्ञ से ब्राम्हण सारे इनसे विरोध जताते हैं, इनसे विरोध जताते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(24) क्षत्रिय धर्म मे बिना बलि के यज्ञ नहीं होते, बिना बलि के यज्ञ तुम्हारे पूर्ण नहीं होंगे-੨
क्षत्रिय धर्म को छोड़ के वैश्य धर्म निभाते हैं, वैश्य धर्म निभाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(25) देख विरोध को अग्रसेन बिल्कुल ना घबराये, वैश्य धर्म को खुशी खुशी से हृदय से अपनाये-੨
हिंसा छोड़ अहिंसा को दिल से अपनाते हैं, दिल से अपनाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(26) अग्रसेन महाराज जी ने अग्र समाज बनाया, सुन्दर सुन्दर नामों से गोत्रो को खूब सजाया-੨
इन गोत्रो के नाम के विवरण तुम्हें बताते हैं, विवरण तुम्हे बताते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(27) ऐरन गोयन गोयल मित्तल मधुकुल कुच्छल सिंघल, मुदगल मंगल भंदल कंसल बंसल नांगल जिंदल-੨
तिंगल तायल धारण गर्ग नाम कहाते हैं, सारे जाने जाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(28) इक दूजे से सबको जोड़े महाराजा अग्रसेन,
अग्रसमाज आज भी आगे ये है इनकी देन-੨
कोटि नमन है आदर्शो को जो हमें चलाते हैं, जो हमें चलाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों.....
जय अग्रसेन महाराज.....
(29) अग्रसमाज में जो शामिल हो रखना इतना ध्यान, एक रुपया एक ईंट से करना तुम सम्मान---੨
क्षमता ममता और समता का पाठ पढ़ाते हैं, हमें पाठ पढ़ाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों....
जय अग्रसेन महाराज.....
(30) इनके पदचिन्हों पे "मोहता" आगे बढ़ते जाओ, अग्र समाज की हो उन्नति हो ऐसा कुछ कर जाओ-੨
हम अग्रपिता के वंशज लक्ष्मी पुत्र कहाते हैं, लक्ष्मी पुत्र कहाते हैं।
श्री अग्रजनक के चरणों मे हम शीश झुकाते हैं, हम शीश झुकाते हैं।
जय अग्रसेन महाराज जय जय अग्रवाल सामाज -੨
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Lyrics: -Rekha Mohini Bansal
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Coming Soon: On Youtube
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प्रेषक: अग्रवंशी प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)
सभी अग्रबंधुओं को.. ।। जय श्री अग्रसेन ।।
singhalpardeep.blogspot.com
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